मारपीट के बाद मेयो इंस्टीट्यूट में भारी पुलिस बल तैनात, चार थानों की फोर्स, SDM व CO सिटी मौके पर
मारपीट के बाद मेयो इंस्टीट्यूट में भारी पुलिस बल तैनात, चार थानों की फोर्स, SDM व CO सिटी मौके पर
घटिया खाने की शिकायत पर MBBS छात्र की पिटाई, चीफ वार्डन पर रॉड से हमला करने का आरोप**
चौधरी उसमान/ संवादाता रिपब्लिक रेनेसाँ
बाराबंकी। जनपद के सफेदाबाद स्थित मेयो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है। शुक्रवार को हॉस्टल की बदहाल व्यवस्था और घटिया मेस खाने की शिकायत करने पहुंचे एक एमबीबीएस छात्र के साथ चीफ वार्डन व उसके सहयोगियों द्वारा बेरहमी से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि छात्र पर लोहे की रॉड और डंडों से हमला किया गया। जिससे कॉलेज परिसर में तनाव फैल गया।
पीड़ित छात्र सुबह अपनी समस्याओं को लेकर चीफ वार्डन के पास पहुंचा था। आरोप है कि समस्या सुलझाने के बजाय वार्डन ने छात्र से अभद्र व्यवहार किया और फिर अपने साथियों के साथ मिलकर उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि वार्डन व उसके सहयोगियों ने छात्र को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। बीच-बचाव करने पहुंचे अन्य छात्रों को भी गालियां दी गईं और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही सैकड़ों छात्र-छात्राओं में आक्रोश फैल गया।छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे परिसर में अफरा-तफरी और तनावपूर्ण माहौल बन गया। स्थिति बिगड़ती देख नगर कोतवाली पुलिस सहित चार थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। इसके साथ ही एसडीएम और सीओ सिटी भी घटनास्थल पर मौजूद रहे। देर शाम तक कॉलेज परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा और हंगामे की स्थिति बनी रही। हालात को नियंत्रित करने के लिए कॉलेज की डायरेक्टर मधुरिका सिंह ने लाउडस्पीकर के माध्यम से छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने छात्रों को आश्वस्त करते हुए बताया कि विवादित चीफ वार्डन को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है और जल्द ही नया वार्डन नियुक्त किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए कॉलेज से बर्खास्त किया जाएगा। पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों का सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। प्राप्त तहरीर और जांच रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह पहला मौका नहीं है जब मेयो मेडिकल कॉलेज विवादों में आया हो। इससे पहले भी संस्थान पर छात्रा उत्पीड़न, सरकारी नियमों से अधिक फीस वसूली, छात्रों पर अवैध जुर्माना थोपने, मानसिक प्रताड़ना, डॉक्टरों के वेतन में कटौती और कोविड काल में लापरवाही जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। वर्ष 2021-22 में छात्रों ने उत्पीड़न और लाखों रुपये के जुर्माने के विरोध में धरना प्रदर्शन किया था। वहीं, पिछले वर्ष महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (DGME) की जांच में भी संस्थान प्रबंधन को अवैध वसूली और अवैध निलंबन का दोषी पाया गया था।
छात्रों का कहना है कि मेयो जैसे निजी मेडिकल कॉलेज में लाखों रुपये की भारी फीस ली जाती है, लेकिन इसके बदले न तो हॉस्टल में रहने लायक सुविधाएं उपलब्ध हैं और न ही मेस में पौष्टिक व गुणवत्तापूर्ण भोजन दिया जाता है। छात्रों का आरोप है कि जब वे अपनी समस्याएं उठाते हैं तो प्रबंधन द्वारा उन्हें डराया-धमकाया जाता है। फिलहाल पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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