जब भी समय मिले प्रभु की आराधना जरुर करना चाहिए जिससे आत्मा को शांति मिलती है:सुबोध कांत

जब भी समय मिले प्रभु की आराधना जरुर करना चाहिए जिससे आत्मा को शांति मिलती है:सुबोध कांत

जब भी समय मिले प्रभु की आराधना जरुर करना चाहिए जिससे आत्मा को शांति मिलती है:सुबोध कांत


रिज़वान अहमद/ संवादाता रिपब्लिक रेनेसाँ 

मसौली /बाराबंकी: मनुष्य परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभाने में दिन-रात मेहनत के लगा है। उसके पास पूजा पाठ का समय नही मिलता है।इसका मतलब कि आप लोग घर की जिम्मेदारी निभाते रहे और खा-पीकर जब समय मिले तब प्रभु का ध्यान लगाये जिससे आत्म को शन्ति प्राप्त होती है। उक्त बातें बुधवार चित्रकूट से पधारे कथा व्यास सुबोध कांत ने दशहरा बाग स्थित रामलीला मैदान श्रीमद्भागवत के छठे दिन कही। कथा वाचक सुबोध कांत ने कथा में  प्रसंग  में भक्ति और कर्म दोनों का समन्वय बताया गया कि कैसे गोपियाँ घर गृहस्थी का सारा काम करते हुए भी श्रीकृष्ण की भक्ति कर लेती हैं। दूध दुहते हुए, भोजन बनाते हुए निरंतर कृष्ण का चिंतन करती रहती हैं।महारास के प्रसंग में बताया गया कि जीव औऱ भगवान का स्थायी मिलन ही रास है। रुक्मिणी कृष्ण विवाह का प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि रुक्मिणी का अर्थ संपत्ति होता है और संसार की समस्त सम्पत्ति तो सिर्फ श्रीहरि की ही है। इस सम्पत्ति पर अपना अभिमान नही रखना चाहिए।
इस मौके पर किरन वर्मा,सन्दीप वर्मा, मुकेश वर्मा, उत्तम वर्मा रामबरन यादव, विवेक अवस्थी, पंकज वर्मा, सुरेन्द्र सिंह,विमल वर्मा, अशोक, आशीष वर्मा, कपिल, सचिन मौर्या, अंकित सहित महिलाएं, पुरुष और बच्चे मौजूद थे।