आल्हा-उदल की धरती महोबा बनेगा नया टूरिज्म हब, स्वदेश दर्शन 2.0 से बदलेगी बुंदेलखंड की सूरत
आल्हा-उदल की धरती महोबा बनेगा नया टूरिज्म हब, स्वदेश दर्शन 2.0 से बदलेगी बुंदेलखंड की सूरत
24.98 करोड़ की लागत से पर्यटन क्रांति, ‘सन इंटरप्रिटेशन सेंटर’ बनेगा नई पहचान
28 लाख पर्यटकों ने बढ़ाया मान, संस्कृति और सस्टेनेबिलिटी का अनोखा संगम
रिपब्लिक रैनैसां ब्यूरो हरी सिंह वर्मा
लखनऊ/महोबा:
चंदेलकालीन गौरव, आल्हा-उदल की वीरगाथाओं और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध महोबा अब पर्यटन के क्षेत्र में नई उड़ान भरने जा रहा है। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत इस ऐतिहासिक जिले को कल्चरल और एजुकेशनल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार का फोकस अब बुंदेलखंड क्षेत्र पर है, ताकि यहां की प्राचीन पहचान और सांस्कृतिक सिर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के निर्देशानुसार महोबा में 24.98 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड टूरिज्म डेवलपमेंट प्रोजेक्ट संचालित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य पर्यटन अधोसंरचना को सुदृढ़ करना और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत सन इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण, त्रिकोणीय गार्डन का विकास, भव्य प्रवेश द्वारों की स्थापना और साइनेज व्यवस्था की जा रही है। परियोजना को वर्ष 2026 के अंत तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता और इतिहास का जीवंत अध्याय है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महोबा की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। वर्ष 2025 में लगभग 28 लाख पर्यटकों के आगमन ने इस क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता को प्रमाणित किया है। यह परियोजना आने वाले समय में स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी।
परियोजना का मुख्य आकर्षण 4,210 वर्ग मीटर में विकसित हो रहा सन इंटरप्रिटेशन सेंटर है, जो सूर्य के वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करेगा। केंद्र की छत दिन के आठ प्रहरों का प्रतीक होगी, जबकि परिसर में स्थापित सनडायल सूर्य की किरणों से समय बताएगी। यहां सोलर पैनल, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, ग्रास पेवर्स और इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी इको-फ्रेंडली व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे ग्रीन और सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र में इंटरैक्टिव गैलरियों की श्रृंखला तैयार की जाएगी, जहां भारतीय संस्कृति में सूर्य के महत्व के साथ-साथ प्राचीन ग्रीक देवता हेलिओस की कथा को चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा। कोणार्क और मार्तंड सूर्य मंदिरों के आर्किटेक्चरल मॉडल, एस्ट्रोनॉमी गैलरी और 3डी प्रोजेक्शन आधारित प्रदर्शन पर्यटकों को ज्ञानवर्धक अनुभव प्रदान करेंगे।
इसके अतिरिक्त, सन इंटरप्रिटेशन सेंटर से लगभग चार किलोमीटर दूर शिवतांडव रोड पर त्रिकोणीय गार्डन विकसित किया जा रहा है, जहां सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य देव की भव्य प्रतिमा स्थापित होगी। पर्यटकों के स्वागत के लिए तीन आकर्षक प्रवेश द्वार भी बनाए जा रहे हैं, जो महोबा की विरासत को नई दृश्य पहचान देंगे।
अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने कहा कि यह परियोजना केवल पर्यटन विकास तक सीमित नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं के लिए इतिहास व संस्कृति को समझने का एक शैक्षणिक केंद्र भी बनेगी। स्वदेश दर्शन 2.0 के माध्यम से महोबा जल्द ही बुंदेलखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल बनकर राज्य के टूरिज्म मैप पर नई पहचान स्थापित करेगा।
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