कांग्रेस के मनरेगा से बीजेपी के वीबी-जी-रामजी तक

कांग्रेस के मनरेगा से बीजेपी के वीबी-जी-रामजी तक

कांग्रेस के मनरेगा से बीजेपी के वीबी-जी-रामजी तक

सुधीर श्रीवास्तव , लेखक व सम्पादक 
ब्यूरो/रिपब्लिक रेनैसां

मनरेगा समाप्त करने के विरोध में प्रदर्शन क्यों ? 

मनरेगा अर्थात विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारन्टी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ इस संशोधित नई योजना का केन्द्रीय श्रम संगठनों तथा विपक्ष द्वारा विरोध किया जा रहा है। इसी क्रम में मनरेगा को बदलने वाले विधेयक पर कांग्रेस पार्टी ने अपनी आपत्ति प्रकट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि दिया जाना खोखला, पाखण्डपूर्ण और दिखावा मात्र है। उनकी मंशा मनरेगा योजना से महात्मा गाँधी के नाम को मिटाना है। गरीबों के लिए जारी योजना का नाम बदलना ग्रामीण सहजीवन की अनदेखी करना है।
मोदी का राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देना पाखण्डपूर्ण:

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि यह केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा मात्र योजना का नाम बदलने का ही प्रकरण नहीं है वरन् यह मनरेगा को समाप्त करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि गरीबों के अधिकारों से नफरत करने वाली सरकार ने ही मनेगा पर हमला किया है। कांग्रेस पार्टी इस सरकार के किसकी भी मजदूर विरोधी फैसले का संसद से लेकर सड़कों तक कड़ा विरोध करेगी। कांग्रेस लाखों गरीबों, मजदूरों और कामगारों के अधिकारों को छीनने के किसी भी प्रयास का हर सम्भव विरोध करेगी। देश भर के विपक्षी दल और विभिन्न श्रमिक संगठन केन्द्र सरकार द्वारा किए गए मनरेगा के नाम परिवर्तन का विरोध कर रहे हैं। 
    उत्तर प्रदेश के मजदूर संगठनों नें भी मनरेगा का नाम बदलने पर विरोध किया है। इस क्रम में वाराणसी की मनरेगा मजदूर यूनियन ने एक बैठक सह-संयोजिका रेनू पटेल की अध्यक्षता में आयोजित किया। इसमें सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ किए जाने के निर्णय का प्रबल विरोध किया गया है। इसमें भी सरकार पर यह आरोप लगाया गया कि जी राम जी’ नाम देकर मनरेगा योजना की पहचान मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। वाराणसी की मजदूर यूनियन ने प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में गाँव-गाँव जाकर मजदूरों के बीच बैठक कर मनरेगा के परिवर्तित स्वरूप से श्रमिकों को होने वाले दुष्प्रभावों से अवगत कराया और अपने अधिकारों के लिए उनमें जागरूकता और एकजुटता का प्रसार कर रही है। 
    पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव ने कहा कि केन्द्र सरकार गरीबो और किसानों के अधिकार की योजनाओं को समाप्त करने पर तुली है। जबकि मनरेगा ने ग्रामीण रोजगार को नई पहचान दिया था। अब अधिकारों की यह लड़ाई गाँव से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी।
    जनपद जौनपुर के ब्लाक मुंगराबादशाहपुर के ब्लाक मुख्यालय पर भी केन्द्र सरकार की मनरेगा समाप्त किए जाने के लिए जारी नई ‘वीबी-जी-राम-जी’ योजना के विरोध में विशाल प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन सम्बन्धित अधिकारी को सौंपा। इसमें भाजपा सरकार को मजदूर विरोध बताते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों, गरीबों और महिलाओं को गांव में ही वर्ष के भीतर 100 दिन के रोजगार की गारटी थी। इससे शहरी पलायन पर रोक लगी थी। वर्तमान सरकार मनरेगा को परिवर्तित कर गरीब, मजदूर और महिलाओं के रोजगार के अधिकार का हनन कर उनके संवैधानिक अधिकारों की हत्या कर रही है। इंटक उत्तर प्रदेश के सचिव दिलीप श्रीवास्तव ने केन्द्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए मनरेगा समाप्त किए जाने की सोची समझी रणनीति की कड़े शब्दों में निन्दा करते हुए कहा कि इससे मजदूरों के रोजगार के अवसर छिन रहे हैं। सरकार यदि मनरेगा को अपने पूर्व रूप में बहाल नहीं करती तो मजदूर वर्ग संसद तक मार्च और प्रदर्शन करेगा। विरोध का यह क्रम उत्तर प्रदेश के साथ ही देश के अन्य राज्यों में भी जारी रहा।   
    इसी प्रकार प्रदेश के अनेक जनपदों में मनरेगा श्रमिकों के पक्ष में विभिन्न श्रम संगठनों तथा कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को उसके पूर्व स्वरूप में बहाल किए जाने तक आन्दोलन जारी रखने के संकल्प को दोहराया। प्रदर्शन में वक्ताओं ने मनरेगा के स्थान पर नई व्यवस्था विकसित भारत रोजगार व आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) को समाप्त कर उसे पूर्व जारी मनरेगा के मूल रूप में वापस किए जाने तक संघर्ष जारी रखने का आवाहन किया। मनरेगा के मजदूरों को पूरे वर्ष तक काम दिए जाने, न्यूनतम दैनिक मजदूरी 700 रूपए प्रति दिन की दर से निर्धारित किए जाने तथा श्रमिक की दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रितों को 25 लाख रूपए का मुआवजा तथा परिवार के एक व्यक्ति को सरकार नौकरी देने की मांग की गई। इस कानून के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने विगत 10 जनवरी से 45 दिनों के विरोध प्रदर्शन का आवाहन किया था। यही नहीं वीबी-जी राम जी कानून के खिलाफ पश्चिम बंगाल तथा केरल ने भी विरोध प्रदर्शन किया गया। देश में कर्नाटक, तेलंगाना और पंजाब राज्य ने इसके विरोध में प्रस्ताव भी पारित किया है। 
परन्तु, इस नई योजना में राज्य सरकारें कहाँ-कहाँ और क्या कार्य कराएगी यह केन्द्र सरकार ही तय करेगी। इस योजना में पहले केन्द्र सरकार 90 प्रतिशत तक बजट आवंटित करती थी जबकि अब कुल खर्च का 60 प्रतिशत ही केन्द्र सरकार देगी शेष 40 प्रतिशत बजट राज्य सरकारों को उठाना होगा। इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में इस योजना के अन्तर्गत होने वाले बजट का 90 फीसदी खर्च स्वयं वहन करेगी शेष 10 प्रतिशत ही केन्द्र शासित प्रदेशों को देना होगा। 
निष्कर्षतः सरकार द्वारा जारी वीबी जी राम जी योजना में मजदूरों के पक्ष में जो दिखाई देता है वह यह है कि उन्हें 100 दिन के काम के विपरीत अब नई योजना में 125 दिन का काम वर्ष में दिया जाएगा। श्रमिकों के पारिश्रमिक का भुगतान साप्ताहिक आधार पर, बिचौलियों को खत्म करने के लिए डिजिटल एमआईएस डैशबोर्ड के साथ ही इस योजना के द्वारा श्रमिकों को सम्मान, काम और उनकी आर्थिक दशा सुधारने की दिशा में केन्द्र की भाजपा सरकार का ऐतिहासिक कदम है। परन्तु यदि राज्य सरकारे अपने हिस्से का बजट इस योजना के लिए आवंटित करने में असमर्थ रहती हैं और अपनी खराब आर्थिक स्थिति के कारण वांछित कार्य न उपलब्ध करा सकीं तो काफी हद तक यह सम्भव है कि इस योजना के प्रति राज्य सरकारों का रूझान कम हो जाए तथा धीरे-धीरे यह योजना दम ही तोड़ दे। इसलिए आवश्यक है कि जब केन्द्र सरकार योजनानुसार कार्य और बजट आवंटन कर रही है तो योजना की सूक्ष्म निगरानी का दायित्व भी उसे ही निभाना होगा, जिससे श्रमिकों का अहित न होने पाए। श्रमिकों का गांवों से पलायन न हो।समाप्त।