बसपा के जन्मदाता कांशीराम का स्मरण करना कांग्रेस एवं सपा का अवसरवादी फैशन- मायावती
बसपा के जन्मदाता कांशीराम का स्मरण करना कांग्रेस एवं सपा का अवसरवादी फैशन- मायावती
पार्टी कार्यकर्ताओं से राजनीतिक दलों, विशेष रूप से कांग्रेस द्वारा बसपा को कमजोर करने के प्रयासों के प्रति सतर्क रहने का आवाहन
सुधीर श्रीवास्तव ब्यूरोचीफ रिपब्लिक रेनैसां
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख, पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने देश भर के अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से अन्य राजनीतिक दलों, विशेष रूप से कांग्रेस द्वारा बसपा को कमजोर करने के प्रयासों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र में कई वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने बी आर आंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया तो अब पार्टी कांशीराम को सम्मानित करने का प्रस्ताव कैसे कर सकती है। उल्लेखनीय है कि यह बयान उन्होंने कांग्रेस के उस प्रस्ताव पर दिया जिसमें कांग्रेस द्वारा कहा गया कि यदि उनकी सरकार सत्ता में आती है तो बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दलितों के मसीहा और संविधान के प्रमुख निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया, न ही उन्हें भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया... तो अब वही पार्टी कांशीराम को कैसे सम्मानित कर सकती है? बसपा प्रमुख सुश्री मायावती ने कहा कि केंद्र में सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने कांशीराम के निधन पर एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया। इसी तरह, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार ने भी राजकीय शोक की घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले कई संगठन और राजनीतिक दल, जो अक्सर बड़े राजनीतिक दलों के हाथों की कठपुतली बनकर काम करते हैं, बसपा को कमजोर करने की कोशिश करते हुए राजनीतिक लाभ के लिए कांशीराम के नाम का लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं।
मायावती ने कहा, ‘‘अब ये सभी दल कांशीराम द्वारा बनाई गई पार्टी बसपा को आए दिन अलग-अलग हथकंडे इस्तेमाल करके कमजोर करने में लगे हैं इसलिए उनके (कांशीराम के) अनुयायियों और समर्थकों को सतर्क रहना चाहिए, विशेष रूप से कांग्रेस के खिलाफ
जिसकी दलित विरोधी विचारधारा और मानसिकता ने बसपा के गठन को आवश्यक बना दिया। उन्होंने कहा कि कांसीराम के मिशन के प्रति समर्पित होकर संविधान के पवित्र समतामूलक और कल्याणकारी उद्देश्यों को ज़मीन पर उतारने का कार्य अगर सही नीयत से किया गया होता तो न तो उन्हें बसपा की स्थापना की ज़रूरत करनी पड़ती और न ही अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी एवं पिछड़ेपन आदि का बोझ बहुजन समाज को झेलना पड़ता। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि बहुजन समाज’ ने अपने हित, कल्याण आदि हेतु कांग्रेस, भाजपा, सपा जैसी पार्टियों को बार-बार आज़माया है लेकिन हर बार उन्हें भारी निराशा ही मिली है क्योंकि ये पार्टियां गिरगिट की तरह रंग बदलती हुई ज़्यादातर नज़र आती हैं। उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं/समर्थकों को संदेश देते हुए उनका आवाहन किया कि किसी भी हाल में वे वोट के इन सौदागरों के हाथों में न खेलें,यही बाबा साहेब डा. भीमराव आंबेडकर एवं कांशीराम जी के जीवन संघर्ष के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। कांशीराम जयन्ती के अवसर पर बहुजन समाज पार्टी हमेशा की तरह इस बार भी कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
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