काशी में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़े जाने से आक्रोश,
काशी में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़े जाने से आक्रोश,
पाल-बघेल-धनगर समाज ने सौंपा ज्ञापन
मुश्ताक अली ब्यूरो चीफ
झाँसी। काशी स्थित ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति को तोड़े जाने एवं उसके साथ किए गए अनादरपूर्ण व्यवहार को लेकर पाल-बघेल-धनगर समाज में गहरा रोष व्याप्त है। समाज के लोगों ने इस घटना को न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का अपमान बताया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मणिकर्णिका घाट का निर्माण लोकमाता अहिल्याबाई होलकर द्वारा कराया गया था। नगर प्रशासन काशी द्वारा दिनांक 10 जनवरी को घाट तोड़ने की कार्यवाही की गई, जिसमें घाट पर स्थापित लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, मूर्ति को हटाने के बाद उसे लापरवाहीपूर्वक मार्ग में फेंक दिया गया, जिससे समाज की भावनाएँ आहत हुई हैं।
इस घटना के विरोध में पाल-बघेल-धनगर समाज के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग की। समाज के नेताओं ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर एक महान शासिका, समाज सुधारक एवं राष्ट्र गौरव हैं, जिनका इस प्रकार अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
ज्ञापन सौंपने का नेतृत्व सुगर सिंह पाल (जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय पाल महासभा), एड. भारत पाल (जिलाध्यक्ष, पाल-बघेल-धनगर महासभा) एवं हरिओम पाल बाबरी (युवा जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय पाल महासभा) ने किया।
इस अवसर पर जुगल किशोर, शिवचरण पाल, हरप्रसाद पाल, हरनारायण, मनीष पाल, एड. ब्रजकिशोर पाल, भूरपाल, ओमप्रकाश पप्पू यादव, करन पाल, अशोक पाल, रघुवीर पाल, हरिओम पाल एवं सुशील कुमार पाल सहित अनेक समाज के लोग उपस्थित रहे।
समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों को दंडित किया जाए तथा लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति को शीघ्र ही सम्मानजनक एवं सुरक्षित स्थान पर पुनः स्थापित किया जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।
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