एसआर  में फाउंडर्स डे की धूम : हर्षोल्लास के साथ मनाया गया एमएलसी पवन सिंह चौहान का जन्मदिन

एसआर  में फाउंडर्स डे की धूम : हर्षोल्लास के साथ मनाया गया एमएलसी पवन सिंह चौहान का जन्मदिन

एसआर  में फाउंडर्स डे की धूम : हर्षोल्लास के साथ मनाया गया एमएलसी पवन सिंह चौहान का जन्मदिन

रामकृष्ण मिश्रा / ब्यूरो रिपब्लिक रैऺनैसां

लखनऊ। मंगलवार को प्रतिष्ठित एस आर समूह में  संस्थापक दिवस अत्यंत भव्यता के साथ मनाया गया। यह अवसर तब और भी खास हो गया जब संस्थान के चेयरमैन एवं सीतापुर से एमएलसी पवन सिंह चौहान  का जन्मदिन पूरे परिसर में उत्सव के रूप में मनाया गया। सुबह से ही फूलों की महक और रोशनी से सजे संस्थान में एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण चेयरमैन पवन सिंह चौहान  के जीवन पर आधारित ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति रही। इस फिल्म के माध्यम से दिखाया गया कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर, चाय बेचने जैसे शुरुआती संघर्षों को पार करते हुए, उन्होंने एक विशाल शैक्षिक साम्राज्य और सफल राजनीतिक करियर स्थापित किया। इस सफर ने वहां मौजूद हजारों युवाओं और शिक्षकों की आंखों में गर्व और प्रेरणा के भाव भर दिए। इस गौरवशाली अवसर पर चेयरमैन  के साथ उनका पूरा परिवार वाइस चेयरमैन पीयूष सिंह चौहान, वाइस चेयरपर्सन श्रीमती निर्मला सिंह चौहान, दामाद डॉ. वैष्णव सिंह, पुत्री डॉ. पल्लवी सिंह और वाइस चेयरपर्सन श्रीमती सुष्मिता सिंह चौहान मौजूद रहे। संस्थान के समस्त विभागों के अधिकारियों और फैकल्टी सदस्यों ने पवन सिंह चौहान के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किए और उनके दीर्घायु होने की कामना की। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा से समां बांध दिया। रंगारंग नृत्य, देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों और शिक्षा व संस्कार पर आधारित नाटकों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छात्रों के इस प्रदर्शन में अपने मार्गदर्शक ( फाउंडर) के प्रति गहरा सम्मान साफ झलक रहा था। समारोह का समापन एक विशाल तहरी भोज के साथ हुआ, जिसमें छात्र, अभिभावक, क्षेत्रीय नागरिक और कर्मचारी सहित 8000 से अधिक लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया। यह दृश्य सामाजिक समरसता और एसआर परिवार की एकता का जीवंत प्रमाण बना। इस अवसर पर पवन सिंह चौहान ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो संस्कारों से युक्त हों और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।