अनाथालय पहुंचकर बुंदेलों ने राष्ट्रपिता को दी श्रद्धांजलि

अनाथालय पहुंचकर बुंदेलों ने राष्ट्रपिता को दी श्रद्धांजलि

अनाथालय पहुंचकर बुंदेलों ने राष्ट्रपिता को दी श्रद्धांजलि


1929 में महोबा आकर गांधीजी ने रखी थी अनाथालय की नींव – तारा पाटकर

 रिपब्लिक रैनैसां ब्यूरो हरी सिंह वर्मा 


महोबा।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बुंदेली समाज के लोगों ने गांधीजी द्वारा स्थापित ऐतिहासिक अनाथालय पहुंचकर उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने राष्ट्रपिता के विचारों को स्मरण करते हुए उनके बताए सत्य, अहिंसा और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर बुंदेलखंडी ने बताया कि महात्मा गांधी ने अपने निधन से लगभग 19 वर्ष पूर्व, 21 नवंबर 1929 को महोबा प्रवास के दौरान अनाथ बच्चों के कल्याण हेतु इस अनाथालय की नींव रखी थी। गांधीजी उस समय एक राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेने महोबा आए थे और उन्होंने समाज के सबसे कमजोर वर्ग—अनाथ बच्चों—के लिए यह ऐतिहासिक पहल की।
उन्होंने बताया कि पं. बैजनाथ तिवारी एवं उमादत्त शुक्ला की देखरेख में यह अनाथालय लगभग दस वर्षों में बनकर तैयार हुआ। अपने 95 वर्षों के गौरवशाली सफर में इस अनाथालय में पले-बढ़े अनेक बच्चे आज देश के विभिन्न हिस्सों में अच्छी-अच्छी नौकरियों और जिम्मेदार पदों पर कार्यरत हैं। आज यह अनाथालय न केवल सेवा का केंद्र है, बल्कि महोबा की एक अमूल्य धरोहर के रूप में भी जाना जाता है।
तारा पाटकर ने बताया कि यह संस्था प्रांतीय बाल सेवा सदन अनाथालय के नाम से प्रसिद्ध है। इमारत के ऊपर स्थापित गांधीजी की आदमकद प्रतिमा तथा उनके साथ विराजमान तीन बंदर—बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत करो—बचपन से ही लोगों को आकर्षित करते रहे हैं। गांधीजी का यह संदेश आज भी समाज को नैतिकता और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान अनाथालय परिसर में शांति और सम्मान का वातावरण रहा। उपस्थित लोगों ने गांधीजी के आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर अनाथालय के प्रबंधक राजकुमार त्रिपाठी, गया प्रसाद कोस्टा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, बुंदेली समाज के सदस्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रपिता को नमन करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने के संकल्प के साथ किया गया।