पंचायत चुनाव में अति पिछड़ों को मिले आरक्षण 

पंचायत चुनाव में अति पिछड़ों को मिले आरक्षण 

पंचायत चुनाव में अति पिछड़ों को मिले आरक्षण 


 
रोजगार और सामाजिक अधिकार अभियान की बैठक में हुआ फैसला। ईको गार्डन, लखनऊ में 9 फरवरी को होगा विशाल धरना

सुधीर श्रीवास्तव 
ब्यूरो/रिपब्लिक रेनैसां 

लखनऊ। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट, राष्ट्र उदय पार्टी तथा राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी के संयुक्त तत्वावधान में एक बैठक मैत्रीय आश्रम, गोमती नगर में  संपन्न हुई। बैठक में त्रिस्तरीय चुनाव के पहले अति पिछड़े वर्ग के लिए अलग आरक्षण करने, प्रदेश में सरकारी विभागों में रिक्त छह लाख पदों की तत्काल भर्ती करने, शिक्षा-स्वास्थ्य पर बजट बढ़ाने की‌ मांग की गई। अपनी मांगों के संबंध में आगामी 9 फरवरी को ईको गार्डन में रोजगार और सामाजिक अधिकार अभियान की तरफ से धरना आयोजित कर उत्तर प्रदेश सरकार को मांग पत्र भेजा जाएगा। 

बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीकांत साहू और संचालन अभियान के संयोजक व राष्ट्र उदय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूराम पाल ने किया। बैठक में मुख्य वक्तव्य एआईपीएफ के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने रखा। 


बैठक में कर्पूरी ठाकुर फार्मूले को आज भी सामायिक और प्रासंगिक माना गया। क्योंकि यह फार्मूला प्रतिनिधित्व को लोकतांत्रिक विस्तार देता है, संपत्ति और राष्ट्रीय पूंजी में वंचित तबकों के हिस्सेदारी की बात करता है और भूमिहीन, छोटे, मझोलों किसानों और पारंपरिक पेशा से जुड़े समुदायों के सहकारीकरण पर जोर देता है। इसलिए सरकार से कर्पूरी ठाकुर फॉर्मूला के अनुसार उत्तर प्रदेश में भी आरक्षण की व्यवस्था करने की मांग की गई। कहा गया कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार चाहे तो वह अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में से अति पिछड़ों को अलग आरक्षण दे सकती है। इसके लिए उसे किसी संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है और सुप्रीम कोर्ट भी इसकी स्वीकृति देता है। 

 पत्र में कहा गया कि अति पिछड़ा वर्ग के आरक्षण हेतु बनाई जस्टिस रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट को आज तक केंद्र सरकार ने संसद के पटल पर नहीं रखा। जनगणना में पिछड़ों की संख्या के निर्धारण के लिए कोई कालम नहीं है। यह भी मांग की गई कि अति पिछड़ों की जनगणना पिछड़ा वर्ग में अलग से कराई जाए ताकि इनकी स्थिति का राष्ट्रीय मूल्यांकन हो सके और इनका अलग रजिस्टर बन सके। आदिवासियों के लिए धर्म का कॉलम जनगणना में न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से इसे पूरा करने की अपेक्षा की गई। 

आधार पत्र में कहा गया कि प्रदेश आर्थिक हालात बेहद बुरी है। यहां जितना बजट रखा जाता है लगभग उतना ही कर्ज सरकार के पर है। प्रदेश से पूंजी का पलायन हो रहा है। सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हुए हैं। सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बुरा है। इन सवालों को भी धरने में मजबूती से उठाया जाएगा। बैठक में यह भी कहा गया कि एसआईआर में किसी भी वंचित तबके का नाम ना कटने पाए इसके लिए सचेत पहल की जाए। बैठक में तय किया गया कि 9 फरवरी के धरने के बाद भी यदि उत्तर प्रदेश सरकार सुनवाई नहीं करती है तो मार्च में एक लंबा क्रमिक आंदोलन किया जाएगा।

बैठक में ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस. आर. दारापुरी,  भारतीय मानव समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामधनी बिंद, पटना उच्च न्यायालय के एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर, मेजर हिमांशु सिंह, अति पिछड़ा अधिकार मंच के एडवोकेट जवाहर बघेल, सतीश नायक, उत्तराखंड से आए कल्याण सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य तिलकधारी बिंद, पसमांदा मुसलमान के नेता जोखू सिद्दकी, रोजगार अधिकार अभियान के कोआर्डिनेटर राजेश सचान, भंते राम अवध राव, राम भुवन राम, राष्ट्रीय उदय पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राम आसरे पाल, जस्टिस पार्टी के इंद्रदेव बौद्ध, युवा भारत के आलोक सिंह, अधिवक्ता नितिन मिश्रा आदिवासी नेत्री सविता गोंड, एआईपीएफ के प्रदेश महासचिव डॉक्टर बृज बिहारी, अध्यक्ष डॉक्टर बी. आर. गौतम, दिनकर कपूर, डाक्टर हीरालाल, के के पाल ने अपनी बात रखी। बैठक में समाजवादी चिंतक विजय प्रताप और गांधीवादी राम धीरज भी मौजूद रहे।