​बेटियों की उड़ान: पसगवां के छोटे से गांव की निधि ने बदली समाज की सोच, बनीं मिसाल

​बेटियों की उड़ान: पसगवां के छोटे से गांव की निधि ने बदली समाज की सोच, बनीं मिसाल

​बेटियों की उड़ान: पसगवां के छोटे से गांव की निधि ने बदली समाज की सोच, बनीं मिसाल


दीपक शुक्ला/रिपब्लिक रैनैसां

​लखीमपुर खीरी (पसगवां): विकास खंड पसगवां के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोटरा की एक बेटी ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो बाधाएं रास्ता नहीं रोक सकतीं। गाँव की निधि वर्मा, जो कभी प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाया करती थीं। आज शाहजहाँपुर में एक सफल नर्स के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन गई हैं।

​चुनौतियों के बीच चुनी शिक्षा की राह


​निधि के पिता 'शिक्षा मित्र' और माता 'आंगनवाड़ी' कार्यकत्री हैं, जिसके चलते घर में शिक्षा का माहौल तो था, लेकिन ग्रामीण परिवेश में लड़कियों की उच्च शिक्षा के प्रति समाज का नजरिया अलग था। जहाँ कई परिवार बेटियों की जल्द शादी को प्राथमिकता देते थे, वहीं निधि के माता-पिता ने समाज की टिप्पणियों की परवाह न करते हुए उसे उच्च शिक्षा के लिए शाहजहाँपुर भेजा।

​स्कूल से ही दिखने लगे थे नेतृत्व के गुण

​निधि की सफलता की नींव यूपीएस (UPS) कोटरा में ही पड़ गई थी। वर्ष 2012-13 के दौरान 'मीना मंच' कार्यक्रम के तहत वह स्कूल की सक्रिय अध्यक्ष रहीं। अनुशासन बनाए रखने से लेकर, शिक्षकों की अनुपस्थिति में छोटे बच्चों को गणित और विज्ञान पढ़ाने तक, निधि ने हर जिम्मेदारी बखूबी निभाई। चित्रकारी और कढ़ाई जैसे रचनात्मक कार्यों में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
​आर्थिक आजादी से बढ़ाया मान
​बरेली से एएनएम (ANM) नर्सिंग का कोर्स करने के बाद, निधि आज शाहजहाँपुर में नर्सिंग प्रैक्टिस कर रही हैं। उनकी वित्तीय स्वतंत्रता ने न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है, बल्कि कोटरा गाँव के अन्य परिवारों की सोच भी बदल दी है। अब गाँव के लोग अपनी बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि निधि की तरह आत्मनिर्भर बनाने का सपना देख रहे हैं।

​अपनी जड़ों को नहीं भूलीं निधि

​आज भी निधि समय-समय पर अपने पुराने स्कूल (यूपीएस कोटरा) जाती हैं। वहां वह छात्राओं को 'एनएमएमएससी' (NMMSC) छात्रवृत्ति के लिए प्रेरित करती हैं और स्वास्थ्य व स्वच्छता (Hygiene) पर कार्यशालाएं आयोजित करती हैं।

​निधि का संदेश:
​"आज मैं अपने परिवार पर निर्भर नहीं हूँ, बल्कि उनका सहारा बन गई हूँ। मैं चाहती हूँ कि हर लड़की अपनी क्षमता को पहचाने और कम उम्र में शादी करने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दे।"