दिल्ली के जंतर-मंतर में हुई मजदूर-किसान संसद
दिल्ली के जंतर-मंतर में हुई मजदूर-किसान संसद
जारी किया घोषणापत्र का मसौदा
सुधीर श्रीवास्तव ब्यूरोचीफ रिपब्लिक रेनैसां
नई दिल्ली। केंद्रीय श्रमिक संगठनों/स्वतंत्र क्षेत्रीय महासंघों/संघों के संयुक्त मंच तथा संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जंतर मंतर, नई दिल्ली पर आयोजित मजदूर किसान संसद ने भारत के मजदूरों, किसानों, खेत-मजदूरों तथा अन्य मेहनतकश वर्गों को 12 फरवरी 2026 को हुए भव्य अखिल भारतीय आम हड़ताल के लिए बधाई दिया। इस हड़ताल के द्वारा एकजुटता दिखाते हुए सभी संगठनों ने कॉरपोरेट साम्प्रदायिक गठजोड़ वाली केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी और किसान विरोधी नीतियों को एक कड़ी चेतावनी दी।
देश की राजधानी में संसद सत्र के समानांतर आयोजित यह मजदूर किसान संसद मजदूर किसान समर्थक तथा जन-हितेषी नीतियों के लिए हमारे संयुक्त और समन्वित संघर्षों के क्रम में आयोजित की गई है। यह संसद, अमेरिका के दबाव में असमान और शोषणकारी भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे को स्वीकार करने तथा कॉरपोरेट हितों के साथ मिलकर मजदूर विरोधी और किसान विरोधी नीतियों को लागू करने के लिए, केंद्र सरकार द्वारा की कड़ी निंदा की गई।
इसमें अमेरिका द्वारा अपनी भारी कर्जदारी को कम करने, व्यापार घाटे को घटाने और पेट्रो-डॉलर आधारित वित्तीय नियंत्रण को बनाए रखने के लिए विकासशील देशों पर एकतरफा व्यापारिक शुल्क और शोषणकारी व्यापार शर्तें थोपे जाने का, गहरी चिंता व्यक्त की गई और अमेरिका एवं इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले की कड़ी निंदा भी की गई। अमेरिकी सरकार विश्व के मेहनतकश लोगों की सबसे बड़ी दुश्मन और विश्व शांति के अंतर्राष्ट्रीय संस्थागत ढांचे के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरी है।
यह संसद भारत सरकार से मांग करती है कि वह युद्ध को तुरंत समाप्त कराने की पहल करे और विश्व शांति सुनिश्चित करे। केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करके खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, उनके वेतन और मुआवजे की गारंटी देनी चाहिए तथा कृषि निर्यात के लिए विशेष मुआवजा देकर किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना चाहिए।
इस मजदूर किसान संसद में विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 को वापस लेने की मांग की गई क्योंकि इससे कृषि, घरेलू और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम उपभोक्ताओं तथा सार्वजनिक बिजली क्षेत्र पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। प्रीपेड स्मार्ट मीटर वापस लिए जाएं और सभी उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान की जाए। नया बीज विधेयक 2025 को वापस लेने, ग्रामीण रोजगार-विरोधी वीबी-ग्रामजी को वापस लेने, मनरेगा को बहाल करने, 200 दिन का काम और ₹700 दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करने, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और एनपीएस/यूपीएस को समाप्त करने की मांग की गई।
मजदूर किसान संसद पूरे मेहनतकश बर्ग से आहवान करती है कि यदि सरकार श्रमिकों के सभी अधिकारों जैसे संगठन की स्वतंत्रता, सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार, हड़ताल का अधिकार और 8 घंटे कार्यदिवस को समाप्त करने वाले चार श्रम संहिताओं को लागू करने की कोशिश करती है तो देशभर में संयुक्त संघर्ष तेज किया जाएगा।
हम सरकार से मांग करते हैं कि अति-धनी व्यक्तियों पर कर लगाया जाए और रोजगार, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेंशन और आवास को सभी नागरिकों का मौलिक अधिकार साम्प्रदायिक और विभाजनकारी राजनीति फैलाने वाली शक्तियों को सख्ती से नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने की भी मांग की गई।
यह संसद भारत के लोगों से आहवान करती है कि 23 मार्च 2016 शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाए। 1 अप्रैल 2026 को श्रम संहिताओं की वापसी और अन्य मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी काला दिवस मनाया जाए।
देश के सभी राज्यों में महापंचायतें आयोजित की जाएं ताकि इन मांगों के समर्थन में किसान-मजदूरों को संगठित किया जा सके। मजदूर किसान संसद के माध्यम से देश के सभी मेहनतकश और लोकतांत्रिक वर्गों से इन आंदोलनों के समर्थन में समन्चित सहयोग की अपील की गई है।
admin