संस्कार ही शक्ति है: मोहदियापुर में बच्चों ने माता- पिता के चरणों में अर्पित किया अपना संसार
संस्कार ही शक्ति है: मोहदियापुर में बच्चों ने माता- पिता के चरणों में अर्पित किया अपना संसार
देवेश मिश्रा ब्यूरो प्रमुख लखीमपुर-खीरी
उचौलिया/खीरी। "देवो महेश्वरः साक्षात्, माता-पिता च दैवतम्"— इसी पावन मंत्र को चरितार्थ करते हुए बीती 14 फरवरी को मां गायत्री देवी सरस्वती शिशु मंदिर, मोहदियापुर में आस्था और संस्कारों का एक ऐसा संगम बहा, जिसने हर देखने वाले की आँखों को भक्ति और प्रेम के आंसुओं से भिगो दिया।
'वेलेंटाइन' नहीं, आज मनाया गया 'मातृ-पितृ पूजन दिवस': जहाँ दुनिया पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध में खोई है, वहीं मोहदियापुर के नन्हे-मुन्ने भैया-बहिनों ने अपने पूज्य माता-पिता की आरती उतारकर, तिलक लगाकर आरती कर और उनके चरणों में शीश नवाकर यह सिद्ध कर दिया कि उनके लिए असली 'रोल मॉडल' उनके माता-पिता ही हैं।
शिव-पार्वती और नन्हे गणेश की दिव्य झांकियां:महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में विद्यालय के शिशु वाटिका के नन्हे स्वरूपों ने जब भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य श्री गणेश का रूप धरा, तो ऐसा लगा मानो कैलाश साक्षात धरा पर उतर आया हो।
विशेष आकर्षण: बच्चों को माता-पिता की परिक्रमा करते और आरती करते देख अभिभावक मंत्रमुग्ध हो गए।
वही पूरे प्रोग्राम आयोजन के मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र के हर किसी की मदद व समाजसेवा में सर्वोपरि रहने वाले डॉ. संजीत सिंह सनी व परमजीत कौर ने दीप प्रज्ज्वलन कर इस पुनीत कार्य का शुभारंभ किया। 100 से अधिक अभिभावकों ने इस गौरवमयी पल का साक्षी बनकर स्वयं को धन्य माना।
प्रबंधन एवं नेतृत्व में प्रधानाचार्य विकास पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन और कंवर पाल के ओजस्वी संचालन में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
पूजन विधि को अंकुर पाण्डेय और शिवरात्रि प्रसंग को प्रज्ञा त्रिवेदी ने भव्यता प्रदान की। तथा अनामिका पाल ने इन अनमोल क्षणों को कैमरे में कैद किया।
यहां पर कहा गया कि, "पाश्चात्य सभ्यता का अंधकार मिटाना और सनातन की ज्योति जलाना ही हमारा लक्ष्य है।"
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